लहर
Waves as lovers of the shore — arrival, retreat, and the courage to begin again.
मुसलसल हर लहर एक ठिकाना ढूढती है
कोई माशूका अपने आशिक से मिलने का बहाना ढूढती है
हारकर भी कोशिश करते रहना ही है मोहब्बत
दुनिया मिसाल के लिए ऐसा ही दीवाना ढूढती है |
वो लहर का किनारों को छूना, याद किसी की दिलाता है
वो क़रीब आकर चुप रह जाना, बहुत मुझे सताता है
हम दोनो में भिन्नता भी तो कम नही है लेकिन
एक छूकर चुप हो जाता है, और एक बस छूने को ललचाता है |
वो लहरों का शोर-शराबा, न जाने क्या दर्शाता है
किनारे से मिलने का सुख, या मौत का पछतावा है
इक दिन जब पुछा तो जाना, ये तो बस आवाज है
गुमनामी का दामन छोड़, करना नया आगाज़ है
यह सब देखकर मानो, मुझ में आयी जान है
इश्क़ ही जब बन जाये सपना, फिर सब कुछ आसान है ||
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