तुम्हारा बस खयाल है

One-sided love — unfinished, untaken, yet strangely complete in its own devotion.

वो इश्क़ की कहानिया
वो बचपन की नदायनियाँ
ये सफर क्या कमाल है
तुम्हारा बस खयाल है |

तुम्हारी आखों का अक्स नायाब है
मयखानों से बहती मानो कोई शराब है
तुम्हारी ज़ुल्फ़ों में खो जाऊं, ये ख्वाब बेमिसाल है
तुम्हारा बस खयाल है |

वो छोटी सी नाराज़गी
न जाने में की आवारगी
शहर में इसका बवाल है
तुम्हारा बस खयाल है |

तुम्हारा सपनों में आना, एक आदत बन गयी
न जाने कब तुम मेरी, इबादत बन गयी
इस इश्क़-ऐ-जूनून में, आया नया उबाल है
तुम्हारा बस ख्याल है |

तुम्हारा चेहरा मानो कोई आफताब हो
जिसके दीदार को दिल तरसे, ऐसा खिताब हो
तुम्हारे नूर से तो चंद्रमा भी बेहाल है
तुम्हारा बस खयाल है |

हस्ती खेलती जान हो तुम
दिल का पहला अरमान हो तुम
ये इश्क़ नही तो क्या, बस यही तो सवाल है
तुम्हारा बस खयाल है |

तुम्हारी याद में कलम उठाना, एक होशियारी लगती है
एक अनोखी सी, अजब सी, बेशुमारी लगती है
तुम्हारी मोहब्बत ने, बनाया मुझे शब्दों का दलाल है
तुम्हारा बस ख्याल है |

(एक तरफ़ा प्यार काफी प्योर होता है इसमें आप इश्क़ करते हो, सामने वाले से एक्सपेक्ट नहीं करते)

तुम्हे अपना बनाने की हसरत नहीं है मेरी
तुम चाहत हो, ज़रुरत नहीं हो मेरी
इस अनोखे रिश्ते में, मायने कई हज़ार हैं
तुम्हरा बस ख्याल है |

शायद ये इश्क़ के लव्स, मेरे लबों पे न आएं
तुम्हे पाने की अधूरी हसरत, मेरे जिस्म में रह जाए
इस एक तर्फे इश्क़ का, मुझे नही मलाल है
तुम्हारा बस खयाल है ||

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